बुधवार, 17 मार्च 2010

बीहड़ में सिनेमा...


बीहड़ कभी भी अपनी जगह नहीं बदलते पर बदल गए हैं बीहड़ों के रास्ते और उनकी उम्मीदें! उम्मीदों पर ग्रहण है तो आशाओ पर पानी की गहरी धार, जिसमेंसे बिना सहारे के निकलना बीहड़ों के खातिर चुनौती भी है और जरुरी भी। कभी बीहड़ो की ओर रुख किया तो उपेक्षा ही नज़र आई। डकैतों के खात्मे के बाद विकास के नाम पर अरबों रुपयें मिले पर विकास आज भी उनसे कोसों दूर है। लोगों का रहन-सहन आदिम युग का है। अपराधी यहीं पनपते हैं और भौगोलिक परिस्तीथिया उनका साथ देती है।
बीहड़ में दस्यु समस्या अभी भी मुह फैलाये खड़ी है। कभी पुलिस का आरोप तोकभी डकैतों की कारगुजारियो का दंश। शायद यही बीहड़ का दुर्भाग्य बनगया है। विकास की बातों पर गौर करें तो विकास में बीहड़ उपेक्षीत है।क्योंकि विकास का पैकज बुंदेलखंड के हिस्से में जाता है और विकास केदावे बीहंचल करके ही किया जाता रहा है। यहाँ के स्थानीय नेता भीबीहड़ो का रुख नहीं करना चाहते, लिहाजा उनको बीहड़ो का दर्द नहीं समझआता। बीहड़ के गावों के विकास की खातिर "खेत का पानी खेत में और गाँवका पानी तालाब में" साथ ही अनेक भूमि सुधार योजनाओ का लाभ महज उन्हीजगहों पर हुआ है जहाँ आला अधिकारियो का दौरा कराया जाना है, बाकि केकिसानो के हाथ खाली ही रहे हैं। बीहड़वासियों के बूढी आँखों मेंविकास के सपने तो पलते है पर हकीकत का रूप लेने से पहले ही कईयों आँखेंबंद हो चुकी हैं। उम्मीदों पर ग्रहण है तो भविष्य गर्त में नज़र आता है।विकास के ठेकेदार रसूख वाले बन बेठे हैं। जिनको विकास के नाम पर हर पांचसाल बाद वोट लेना है। उन्हें इस बात से कुछ लेना देना नहीं है कि विकास की जमीनी हकीकत क्या है ? कभी कोई बीहड़ो का रुख करता भी हैं तो बंजरोमें कटीली झाड़ियो के बीच फिर से खुद को न उलझने का जज्बा लेकर जाता है।कभी मौत का मंजर आये दिन अखबारों-खबरिया चैंनलो के लिए " चंबल घाटी औरखून " जैसे सीर्षको से पटी रहती थी। वस्तुतः वीहड़अंचल की भौगोलिकपरिस्तिथिया दस्यु समस्याओ के लिए ज्यादा जिम्मेदार रही हैं। डकैतों कीभूमि तो पहले भी चम्बल रहा है। बात करीब 1920 के आसपास की हैं जबब्रहमचारी डकैत ने डकैती छोडकर आज़ादी के समर में कूदा था, पर आज़ादी केइतिहास के समरगाथा से ब्रहमचारी डकैत गायब हैं। बीहड़ न सिर्फ विकास मेंबल्कि इतिहास में भी उपेक्षा झेलता आया है। आज बीहड़ की पहचान उसकी बदनामी से ही होती है। निर्भेय गुर्जर, फक्कड़, कुशमा, रज्जन, जगजीवन आदि ऐसे नाम रहे हैं जिन्होंने अपने दस्यु जीवन में बीहड़ों को अपने खौफ से उबरनेदिया वहीँ दस्यु सुन्दरी सीमा परिहार के भाग्य का निर्णय मुम्बईया फ़िल्मी बाजार तय नहीं कर सका। सवाल यह उठता है की जब विनाश मीडिया की ख़बरों में नजर आता है तो विकास क्यों उपेक्षित है. आज बीहड़ों का कसूर क्या है? क्या यूं ही इस पर बदनुमा दाग बरकरार रहेगा? या फिर सहयोग की खातिर हाँथ बढाने में कोई झिझक है। हमारा मानना है कि बीहड़ों का शानदार इतिहास दुनिया के सामने आये, न कि इसका बदनुमा अतीत। बीहड़ो में कुछ दर्द है कुछ शिकायत हैं कुछ अपनापन है तो कुछ पाने की हसरत भी इन बीहड़ो में छिपी है।

बीहड़ो की रवानी को दुनिया के सामने लाने कि हसरत ही फिल्म उत्सव (17 मार्च से 19 मार्च,2010) आयोजन का मकसद बनी। उम्मीदों से परे यह फिल्म उत्सव उन बीहड़ गावो में आयोजित हो रहा है जो दस्युओ से प्रभावित रहे हैं. इसके साथ ही मार्च में औरैया, इटावा, मालवा, अम्बेडकर नगर, मऊ में फिल्म उत्सव का आयोजन किया जा रहा है. जिसमे खासतौर से जन सरोकारों पर केन्द्रित युवा फिल्मकारों कि फिल्मो का प्रदर्शन , जारी एवं मंच प्रदान कर प्रोत्साहन देना है. "अवाम का सिनेमा " के माध्यम से आम जन संवाद कर मन की जिज्ञासा शांत कर सके। इसी क्रम में पुरे देश में फिल्म के बहाने युवा प्रतिरोध को स्वर दे सकेंगे, ऐसी उम्मीद दिखती है।

रविवार, 14 मार्च 2010

पढ़ाई पत्रकारिता की और काम दर्जी का

हावड़ा के शिवपूर की ‘नाज़मीन अख्तर’ ने बड़े शौक़ से जर्नलिज़्म की पढ़ाई की थी, लेकिन कोलकाता समेत बंगाल में कहीं भी किसी ने नौकरी नहीं दी। नाज़मीन कहती है- अक्सर उनसे कहा गया कि तुम लोगों का समाज बड़ा ही कंजरवेटिव है। कैसे काम कर पाओगी। अब वो बांग्लादेश के ‘डेली न्यूज़’ अख़बार में लिखती हैं, लेकिन वहां से पैसे नहीं मिलता। थक-हार कर उन्होंने शादी कर ली। ट्यूशन कर कुछ रोज़गार करती हैं और पति के साथ दर्जी का काम बी कर लेती हैं।

साभार- सन्डे नई दुनिया

मंगलवार, 9 मार्च 2010

एक नज़र ज़रा इधर भी...

यह तस्वीरें उस शहर की हैं, जिसे देश के 37 बड़े शहरों में अव्वल बताया गया है। जी! आपने बिल्कुल सही पहचाना यह हमारी दिल्ली ही है।































Nitish spent crores on PR

PRADIP SAGAR
THE SUNDAY GUARDIAN, NEW DELHI.
The Nitish Kumar Government’s expenditure on self- promotion has gone up by 500% in the last four years. Most of this money has been spent on print advertisements, according to replies received on a RTI.
In 2009, the Bihar Government spent almost Rs 25 crore to highlight Nitish Kumar’s achievements. The Bihar Government’s expenditure on publicity was Rs 5.40 crore for 2006-07, while in 2007-08 it was Rs 9.65 cr. The real splurge happened in 2008-09, when Government spent nearly 25 cr on advertisements.
In the current financial year, till January 2010, Bihar Government has spent Rs 18.28 cr on advertisements. K.R. Sharma, the director of Bihar’s Information and Public Relations Department, said, “In the past five years, the Government has expanded its area of activities.
Naturally, the budget for publicity will go up. The previous Government (of Rabri Devi) did not pay attention towards the state’sdevelopment.”
Afroz Alam Sahil, who filed the RTI, told THE SUNDAY GUARDIAN, “several district administrations have replied to me.
The authorities have admitted that they have not spent even a single paisa from the MLAs’ constituency development funds,” alleged Alam.

बिहार का नाम रौशन कर रहे हैं...

“सत्ता संभालते ही नीतिश कुमार ने राज्य में शिक्षा की दरकती दीवार को मज़बूती प्रदान करते हुए इसके आधारभूत ढांचा को मजबूत करते हुए एक नयी संस्कृति की शुरुआत की। प्रारंभिक शिक्षा से लेकर उच्च और तकनीकी शिक्षा तक में गुणात्मक सुधार हेतु त्वरित कार्रवाई की, जिसके सार्थक परिणाम आने लगे हैं। आज बिहार में शिक्षा के विकास के चलते दूसरे प्रदेशों में चलने वाली शिक्षा की दुकानें लगभग बंद हो गई हैं। आज अभिभावकों के कड़ी मेहनत के पैसों का उपयोग बिहार में ही हो रहा है और बच्चे समयानुसार परीक्षा देकर दूसरे राष्ट्रीय संस्थानों में अच्छा स्थान प्राप्त कर बिहार का नाम रौशन कर रहे हैं...... ”

ज़रा ठहरिए! ये आप क्या पढ़ रहे हैं...? ये पंक्तियां मेरे आलेख का हिस्सा नहीं हैं। ये मैं नहीं लिख रहा हूं, बल्कि ये बिहार सरकार द्वारा अपने कार्यकाल के चार साल पूर्ण होने के उपलक्ष्य में देश के कई प्रमुख अखबारों में छपे आठ पृष्टों के विज्ञापन का एक अंश है, जिसे मैंने दिनांक 24 नवंबर 2009 को नई दिल्ली के दैनिक हिन्दुस्तान में पढ़ा। इन पंक्तियों का सच के साथ कोई विशेष रिश्ता नहीं है। क्योंकि मेरे अनुभव तो यही बता रहे हैं, जिसे मैंने स्वयं बिहार के चम्पारण ज़िले में अभी जाकर महसूस की। आईए! इन सच्चाईयों से आप भी रूबरू हो जाईए। ये सच्चाईयां बिहार के उन दो ज़िलों के हैं, जहां नीतिश जी के अधिक संख्या में अपने विधायक व सांसद हैं।
पश्चिम चम्पारण ज़िले के कई मध्य विध्यालय प्रधानाध्यापक विहीन हैं। इस बात की पुष्टि खुद ज़िला शिक्षा अधीक्षक अमित कुमार कर रहे हैं। उनका कहना है कि ‘कई स्कूलों के हेडमास्टर नहीं होने के कारण सभी योजनाओं को लक्ष्य पर पहुंचाने में ग्रहण लग रहा है।’ ज्ञातव्य हो कि ज़िले में करीब अठारह सौ मध्य विध्यालय हैं जिनमें लगभग 60 फीसद मध्य विध्यालय बिना हेडमास्टर के चल रहे हैं।
पश्चिम चम्पारण ज़िले के योगापट्टी के लक्ष्मीपुर उच्च विध्यालय के 800 छात्र महज़ सात शिक्षक के भरोसे हैं। यह विध्यालय कभी ज़िले के गिने-चुने विध्यालयों में आता था, मगर वर्तमान में इसकी स्थिति दयनीय बनती जा रही है। परिसर में लगा पुआल का पुंज विध्यालय की शोभा बढ़ा रहा है। अगर क्षेत्र के बुद्धिजीवियों की बात मानें तो इस विध्यालय में करीब 40 एकड़ ज़मीन है, जो कि संभवतः राज्य के सभी उच्च विध्यालय के परिसंपत्तियों से ज़्यादा है। खुद यहां के प्रभारी प्रधानाध्यापक श्री निवास सिंह का कहना है कि ‘कहने को तो यह विध्यालय संपत्तिशाली है, मगर शिक्षा के नाम पर यहां संसाधनों का टोटा है।’
पश्चिम चम्पारण ज़िले के ही रामनगर का एकमात्र कन्या उच्च विध्यालय +2 शिक्षा संस्थान के रूप में उत्क्रमित तो हुआ लेकिन मामला बस वहीं तक रह गया। यहां एक तरफ शिक्षकों का अभाव है, तो दूसरी ओर नव निर्मित वर्ग कक्षों में ब्लैक बोर्ड का नहीं बनना छात्राओं के लिए अभिशाप साबित होने लगा है। आलम यह है कि कुल 15 सेक्शन में बंटी विध्यालय की वर्ग व्यवस्था के लिए सिर्फ 14 शिक्षक फिलवक़्त यहां पदस्थापित हैं। इनमें से एक इसी माह तथा दो अन्य अगले तीन माह में सेवानिवृत्त हो जाएंगे।
पश्चिम चम्पारण के ज़िला मुख्यालय बेतिया का सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित व ऐतिहासिक महारानी जानकी कुंअर महाविध्यालय में तो बगैर शिक्षक के ही एमए, बीए व इंटर की पढ़ाई हो रही है। चौकिए मत! सिर्फ पढ़ते ही नहीं, बल्कि अच्छे नंबरों से परीक्षा पास भी कर जाते हैं। इस महाविध्यालय में एक-दो विषयों को छोड़कर बाकी सभी विषयों में ही शिक्षकों की भारी कमी है। भूगोल की पढ़ाई के लिए पूरे विश्वविध्यालय में एमजेके कॉलेज की एक अपनी अलग पहचान थी, बल्कि मात्र आरडीएस और एमजेके कॉलेज में ही इस विषय की पढ़ाई होती थी। आज यह विभाग पूरी तरह शिक्षक विहीन है, जबकि एमए भूगोल में छात्र-छात्राओं की संख्या 31 है। महाविध्यालय में अंग्रेज़ी, संस्कृत, उर्दू, रसायनशास्त्र, वनस्पतिशास्त्र, राजनीतिशास्त्र और इतिहास जैसे विषयों के लिए सिर्फ एक-एक शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि भूगोल, संगीत और दर्शनशास्त्र के लिए कोई शिक्षक बहाल नहीं है। इस प्रकार बेतिया के सारे कॉलेजों में बस नामांकन व परीक्षा फॉर्म ही भरा जाता है। पढ़ाई तो छात्र घर पर ही करते हैं। ज़्यादा परेशानी पर वे प्राईवेट कोचिंग का सहारा लेते हैं। वैसे भी नंबर की कोई चिंता होती नहीं। परीक्षा बाद जुगाड़ व कुछ पैसे लगा कर अच्छे नंबर आ ही जाते हैं। एमजेके कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर. एन. राय बताते हैं- ‘कई बार कॉलेज में रिक्त पदों पर शिक्षकों की बहाली तथा दूसरे जगहों से प्रतिनियुक्त करने के लिए विश्वविध्यालय को लिखा गया है। परंतु आज तक इस पर कोई विशेष कार्रवाई नहीं हुई। शिक्षकों की कमी से छात्रों का भविष्य खराब हो रहा है। इसमें कोई संशय नहीं है।’
यही नहीं, बेतिया में गर्वेंट मेडिकल कॉलेज खोलने की पहल नीतिश कुमार जी ने की। यहां तक कि बड़े ताम-झाम के साथ बेतिया के महाराजा स्टेडियम में ही शिलान्यास हुआ। लेकिन आज तक कोई भी काम आगे नहीं बढ़ सका।
बात अगर पूर्वी चम्पारण ज़िले की करें तो वहां भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। मोतिहारी के ज़िला स्कूल में तो +2 की पढ़ाई बगैर किसी शिक्षक के ही चल रही है। यहां +2 के प्रथम वर्ष यानी ग्यारहवीं क्लास में विज्ञान के 75 छात्र हैं और कला के 20, जबकि बारहवीं में विज्ञान के 65 और कला के 45 छात्र हैं, लेकिन इन्हें पढ़ाने के लिए एक भी शिक्षक मौजूद नहीं हैं। दसवीं तक के छात्र इस स्कूल में करीब 800 हैं और इनके लिए शिक्षकों का तादाद वर्तमान में सिर्फ 7 है। मातृभाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी, संस्कृत व इतिहास के एक भी शिक्षक नहीं हैं। हॉस्टल के चार कमरों पर एसटीएफ का कब्ज़ा है। विध्यालय में वायरिंग खराब होने के कारण बिजली की आपूर्ति तक नहीं है। जबकि वर्ष 1867 में ज़िला मुख्यालय मोतिहारी में बना यह ज़िला स्कूल कभी शिक्षा जगत में ज़िले का शान समझा जाता था। इस संबंध में डीईओ महेश चन्द्र पटेल का कहना है कि ‘ज़िला स्कूल के मॉडल स्कूल का दर्जा होने के कारण उसमें वर्तमान नियमावली बनेगी। तत्काल प्रतिनियोजन से शैक्षणिक कार्य चलाने हेतु प्राचार्य को संचिका बढ़ाने का निर्देश दिया गया है।’
मोतिहारी शहर का मंगल सेमिनरी विध्यालय भी शिक्षको की कमी से जुझ रहा है। यहां +2 में 10 शिक्षक हैं जिनमें 1 स्थायी व 9 नियोजित शिक्षक हैं। +2 में वनस्पतिशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, गृहविज्ञान, कामर्स व संगीत के शिक्षक नहीं हैं। लाइब्रेरियन का पद रिक्त है। वहीं सेकंडरी में शारीरिक शिक्षक नहीं है। यहां प्राचार्या मीना कुमारी ने छात्रों को लैब कराए जाने की बात कही, जबकि लैब की सामग्रियों पड़े धूलकण व रखे गए अन्य सामान दूसरी ही कहानी बयां कर रहे हैं। वहीं शिक्षको के झारखंड स्थानांतरित हो जाने की वजह से व्यवसायिक कोर्स की पढ़ाई बाधित हो गई है। विदित हो कि यहां ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग, हाउस होल्ड वायरिंग व रेडियो एंड टीवी टेक्नोलॉजी व्यवसायिक पाठ्यक्रम संचालित होता है। उल्लेखनीय तथ्य यह है कि व्यवसायिक कोर्स के लिए बनने वाला कर्मशाला सह प्रशिक्षण केन्द्र का निर्माण कार्य करीब 15 वर्ष पूर्व अधूरा छोड़ दिया गया जिस कारण आज यह ध्वस्त होने के कगार पर है। यहां आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि विगत 4 जून 2005 को तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा सचिव नवीन वर्मा ने पत्रांक 106 के द्वारा डीएम से कर्मशाला निर्माण से संबंधित उपयोगिता मांगा था। इधर, विध्यालय में पिछले दो साल के अंदर निर्मित भवनों की स्थिति राशि के बंदरबांट का संकेत देती है। मसलन +2 के अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए मिली 26 लाख की राशि से निर्मित दो मंज़िला नए भवन की ज़मीन में उदघाटन के बाद ही दरारें आ गई। इस संबंध में डीईओ महेश चन्द्र पटेल का कहना है कि ‘द्वितीय चरण के नियोजन से शिक्षकों की कमी बहुत हद तक दूर हो जाएगी। प्रायोगिक कक्षाएं चलाने का पूर्व में सभी +2 स्कूलों को निर्देश दिया जा चुका है। लैब नहीं चलने की शिकायत मिलने पर जांच कर कार्रवाई होगी। भवन निर्माण में अनियमितता की जांच होगी।’

तो ये थी दो ज़िलों की कुछ छोटी-छोटी बातें। बाकी का अंदाज़ा आप खुद लगा सकते है। अंत में नितिश जी से यही कहना चाहुंगा कि नीतिश जी बिहार के जनता को कब तक आप धोखा देते रहेंगे। अब जनता आपके झूठे विज्ञापन व वादों के चक्कर में नहीं पड़ने वाली, क्योंकि वो अब आपके शासनकाल में कुछ ज़्यादा ही समझदार हो गई है और शिक्षा के स्तर को उपर उठाने हेतु आप बड़े-बड़े संस्थान तो खोल ही रहे हैं।

अफरोज़ आलम साहिल

सोमवार, 8 मार्च 2010

वूमेन इम्पावरमेंट वाया आर.टी.आई.

महिला सशक्तिकरणऔर सूचना का अधिकार दो अलग-अलग विषय हैं, पर इन दोनों में करीब का रिश्ता है। अबला नारी को सबल बनाने का कार्य सूचना का अधिकार ही कर सकता है। बशर्ते कि महिलाएं इस अधिकार का इस्तेमाल अपने विकास व रोज़मर्रा के कामों को कराने और अपने साथ हो रहे ज़ुल्म व अत्याचार के खात्मे के लिए करें। ऐसा महीं है कि महिलाएं इसका इस्तेमाल नहीं कर रही हैं, बल्कि इसका इस्तेमाल करके फ़ायदा भी हासिल कर रही हैं। इस सत्य को आगे की कहानियों से बखूबी समझा जा सकता व देखा जा सकता है कि किस प्रकार हिंसा वर्जनाओं की शिकार सभी वर्गों की महिलाएं सूचनाधिकार द्वारा इंसाफ़ पा सकती हैं।

दक्षिण दिल्ली के शेख़ सराय इलाक़े की एक झुग्गी-बस्ती में रहने वाली अशरफी देवी उन करोड़ों वंचितों में से एक नाम है, जिन तक पहुंचने से पहले ही सरकार की तमाम योजनाएं दम तोड़ देती हैं। लेकिन पति की असमय मौत फिर अपने दोनों बेटोंके नाता तोड़ लेने के बाद अशरफ़ी देवी का एकमात्र सहारा ये सरकारी योजनाएं ही बची थीं। अनपढ़ अशरफ़ी ने किसी आदमी की मदद से विधवा पेंशन आवेदन समाज कल्याण विभाग के सरकारी दफ़्तर में जमा करा दिया।

वह इस सपने में थी कि पेंशन मिलने पर बाकी की ज़िन्दगी आराम से गुज़र जाएगी, लेकिन इस सपने का सच होना इतना आसान न था। क्योंकि साल भर वह सिर्फ एक से दूसरे, दूसरे से तीसरे बाबू के मेज़ पर चक्कर लगाती रही। लेकिन फायदा कुछ भी नहीं। बल्कि अंत में उस बेसहारा को यह बता दिया गया कि उसका आवेदन खारिज कर दिया गया है।

कुछ दिनों के बाद उसे एक बार फिर पता चला कि दिल्ली नगर निगम में भी विधवा पेंशन देने का प्रावधान है। अशरफ़ी ने एक बार फिर आवेदन किया, लेकिन यहां भी सब कुछ पहले की तरह ही हुआ। अंततः अशरफी ने सतर्क नागरिक संगठन की मदद से सूचना के अधिकार का प्रयोग किया और सूचना मिली कि उसकी पेंशन की अर्ज़ी 6 महीने पहले ही मंज़ूर कर ली गई है। पत्र के साथ ही उसे 6 महीने की पेंशन का चेक भी मिल गया।

दिल्ली के कल्याणपुरी इलाक़े में झुग्गियों में रहने वाली रमाबाई अपना आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 6 महीने तक कार्यालय का चक्कर लगा-लगाकर थक चुकी थी, लेकिन जब उसने परिवर्तन संस्था की मदद से सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया तो महज़ 10 दिनों के भीतर उसे आय प्रमाण पत्र दे दिया गया, यही नहीं उसे अंत्योदय कार्ड बनने में हो रही देरी को भी सूचना के अधिकार से सुलझा लिया।

बंग्लोर में रहने वाली जयलक्षम्मा के पति आयकर विभाग से रिटायर हुए थे और उन्हें 1975 से पेंशन मिल रही थी। पति के मौत के बाद जब उन्होंने पेंशन अपने नाम किए जाने का अनुरोध बैंक को दिया तो उन्हें कर्मचारियों ने परेशान करना शुरू किया। कभी कागज़ों में कमी बताई, तो कभी उनकी असली प्रति लेकर आने के नाम पर उन्हें टाल दिया जाता। अंततः एक सामाजिक कार्यकर्ता के मदद से उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत आवेदन किया। इस आवेदन के जमा होने के 15 दिन के अंदर ही पेंशन के तमाम कागज़ात दे दिए गए, साथ ही पेंशन मिलनी भी शुरू हो गई। इस तरह 81 वर्ष की जयलक्षम्मा ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक लड़ाई महज़ 15 दिन में ही जीत ली।

रूची मनुज फोणगे, पुणे के साम्बायसिस कॉलेज में पढ़ाती हैं। 1997 में उन्हें यहां अस्थाई रूप से सेवा में रखा गया था, लेकिन 2000 में उनकी सेवा स्थाई कर दी गई तथा कॉलेज में तथा कॉलेज में उन्हें बतौर प्राध्यापक सेवा में लिए जाने का नियुक्ति पत्र भी दे दिया गया। साथ ही उनका वेतन बढ़ने की सूचना भी उन्हें दी गई। लेकिन अगले महीने उन्हें बढ़ी हुई राशि नहीं मिली। रूची ने इस सिलसिले में कई दफ्तरो के चक्कर काटे। इसकी शिकायत शिक्षा निदेशालय से की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। बार-बार लिखित अनुरोध करने के बाद हार कर उसे सूचना के अधिकार का प्रयोग किया और महज़ 29 दिनों में उनका 4 साल का बकाया वेतन 3 लाख रूपये चैक के रूप में मिल गया।

इस तरह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में सूचना का अधिकार न सिर्फ भ्रष्टाचार पर एक तमाचा है, बल्कि व्यवस्था को दुरूस्त करने के नाम पर राजनीतिक रोटी सेंकने वालों के लिए एक सबक भी है। इस अधिकार के द्वारा न सिर्फ मानवाधिकार के उल्लंघन के मामलों एवं किसी जांच प्रक्रिया के पूरे हो जाने पर उसके बारे में उसके बारे में सूचना प्राप्त की जा सकती है, बल्कि ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत , ज़िला पंचायत, नगर पंचायत, विधायक, सांसद, विधान परिषद सदस्य इत्यादि के कार्यों, निधियों एवं आय-व्यय के साथ-साथ महिलाओं के लिए चल रहे विकास कार्यों व योजनाओं का भी ब्यौरा लिया जा सकता है, जिससे महिलाओं की सामाजिक-आर्थिक मज़बूती का मार्ग प्रशस्त होगा।

अगर इस अधिकार के इतिहास पर नज़र डाली जाए इसे लागू करने में सबसे अधिक भागीदारी महिलाओं की ही है। इसके लिए महिलाओं ने ही सैकड़ों रातें पथरीली सड़कों पर गुज़ारी हैं। पुलिस के डंडे खाए तथा जेल भी गई हैं। नेताओं, अफसरों और यहां तक कि अपराधियों ने उन्हें निशाना भी बनाया। कई महिलाओं पर जानलेवा हमले भी हुए।

इस प्रकार इसमें महिलाओं का अमूल्य व अद्वितीय योगदान रहा है। यही कानून महिलाओं को पूरी तरह सुरक्षा देने में सक्षम हो सकता है। सूचना के अधिकार के माध्यम से महिला सशक्तिकरण अभियान को और सशक्त बनाया जा सकता है। क्योंकि पारिवारिक जीवन से लेकर राष्ट्रीय संदर्भ में महिलाएं इस अधिकार का प्रयोग कर बहुत कुछ प्राप्त कर सकती हैं तथा अपनी ज़िन्दगी को एक नई दिशा दे सकती हैं, जिनसे उनकी दशा में सुधार की कल्पना की सकती है।

सोमवार, 1 मार्च 2010

List of sarkari Hajis; they include Imams, Muftis

By Mumtaz Alam Falahi, TwoCircles.net,

New Delhi: Government of India every year sends Haj Goodwill Delegation to Saudi Arabia. Members of delegations are handpicked. Have a look at the list of nine such delegations (from 2000 to 2008), and you will conclude: They are politicians, journalists, clerics, bureaucrats and social workers, seemingly picked to please them, award them or silence them.
If you find Dr Farooq Abdullah, Syed Sibte Razi, A R Antulay and Mehbooba Mufti, you will also find Maulana Arshad Madani, Maulana Anzar Shah Kashmiri, Mufti Abdul Mannan Kalimi, Qari Mohammed Mian Mazhari and Maulana Qari Mufti Alhaj Syed Mohammed Noor. Besides, there are Allama Mohd. Tauseef Raza Khan, Peerzada Ayazuddin Chishty, Sajjadah Nasheen of Dargah Hazrat Saleem Chishty, Fatehpur Sikri and Peer Khawaja Ahmed Nizami, chief head priest, Dargah Hazrat Nizamuddin.

Members of Haj Goodwill Delegations 2000-2008
2000
1. Syed Shahnawaz Hussain, Leader of Delegation
2. Abdul Jabbar
3. Kamaluddin Ahmed
4. Akbar Ali Khandekar
5. Nusrat Ali Khan
6. Tanvir Ahmad Usmani
7. Anwar Khan
8. Prof. Shaikh Ali
9. E. Ahmed
10. Mohammed Mahir Azad
11. Dr. Mohammed Muslim
12. Sohail Lokhandwala
13. Gani Bhai Qureshi
14. Mirza Ansar Baig
15. Khwaja Iftekar Ahmed
16. Maulana Qarik Mufti Alhaj Syed Mohammed Noorur
17. G. R. Sofi
18. S. M. Khan
19. L. R. Lashkar
20. Mohammed Iqbal
21. M.W. Haque
22. Qari Mohammed Mian Mazhari
23. Sheikh Manzoor
24. Ghulam Rasool Kar
25. Mohammed Mabisa Khan
26. Mohammed Salahuddin
27. Mohammed Nasim
28. Sheikh Dawood
29. Nure-Alam Chaudhury
30. Hassan Khan

2001
1. Dr. Farooq Abdullah, Chief Minister, Jammu & Kashmir, Leader of Delegation
2. Ms. M. Fathima Beevi, Governor of Tamil Nadu
3. N.M. Farook, Minister for Municipal Administration, Government of Andhra Pradesh
4. Allama Mohd. Tauseef Raza Khan
5. Pir Qabmhir Shah, Sehalo, Barmer, Rajasthan
6. Ramzan Khan, MLA, Byavar, Rajasthan.
7. Mohd. Obaidullah, MLA, Bihar
8. Justice Mr. Bilal Nazki
9. Dr. Khurshid Anwar
10. B.D. Khan, Aghai
11. Mehmood Fayyaz Hashmi
12. Khursheed Hussain Quadri
13. Nafees Ahmed Khan, Chief of Bureau, (Urdu) UNI
14. Ahmed Syed Malihabadi
15. Hamdoon Maricar Basheer Ahmed
16. Riyaz Ali Kaka.
17. Mr Zaheer Mustafa

2002
1. Ali Mohammad Sagar, Minister for Works, J&K Govt, Leader of Delegation
2. Syed Shah Burhan-ud-Din Qadiri, Vibhi Alwa, Hyderabad
3. Dr. Seema Rizwi, Minister of State for Health and Education, Uttar Pradesh Government.
4. Prof. Musrat Ullah Khan, Head of Department Civil Engineering, Jamia Millia Islamia, New Delhi.
5. Mr. Akhlaq Ahmad, MLA Bihar
6. Abdul Mabood Khan, President Dargah Management Committee, Khawaja Sahib, Ajmer.
7. Mr. Mohammad Wasi Ahmad, Advocate Patna High Court
8. Mr. K. Rehman Khan, MP
9. Mr. S. M. Asif, Chairman, All India Minorities Front.
10. Mr. Ilyas Khan, Bhopal
11. Peerzada Shibli Qasim, Ex-President BJP Minority Morcha.
12. Mr. Ali Mohammad Naik, MP
13. Mr. Naseer-ud-Din, New Delhi
14. Dr. Mohammad Javed, MOS Labour, Bihar
15. Mr. Abdul Samad Samadani, MP
16. Justice Fakhruddin, Judge, Chattisgarh High Court
2003
1. Shahnawaz Hussain, Minister for Civil Aviation, Leader of Delegation
2. Cherkalam Abdullah, Minister for Local Self Government, Govt. of Kerala.
3. Abdul Rasheed Shaheen, Member of Parliament (Lok Sabha)
4. Rashid Alvi, MP (Lok Sabha)
5. Peer Mohd. Hussain, MLA (PDP), J&K
6. Imtiaz Mohd. Khan, General Secretary, RLD.
7. Mohd. Yusuf, Gwalior
8. Syed Ashraf, New Delhi
9. Syed Kazim Zaheer, President, Board of Trustees, Shia College & Allied, Lucknow
10. Syed Shah Noorul Haq Qadri, President, Urdu Academy of A.P.
11. Habib Abbas Fakih, Mumbai
12. Mohd. Badruzzaman Khan, Advocate, Jharkhand
13. Javad Kazim, Journalist, Lucknow.
14. Mohd. Amin Ahmed, Jharkhand
15. Sawara Khatoon, Bihar
16. Anis Jamaee, Urdu Journalist with UNI, New Delhi.

2004
1. Mufti Mohd. Sayeed, Chief Minister, J&K, Leader of Delegation
2. Mohd. Abid Saeed Khan, Gurgaon
3. Quyum Ahmed, Jharkhand
4. Dr. Firoza Bano, Member Film Certification, Ministry of Information and Brodcasting, New Delhi
5. Mohd. Ghouse Mohiuddin, Charman AP, State Hajj Committee
6. Abdul Ghani, Gwalior
7. Shahjan Begum, Gwalior
8. A. A. Naqvi, MD, National Backward Classes, New Delhi.
9. Mohd. Mumtaz, Bihar Sharif, Nalanda, Bihar.
10. Ashraf Wani, Spl. Correspondent Aaj Tak TV. Srinagar
11. E. Ahamed, MP, (Lok Sabha)
12. Ahmad Shakeel, Lucknow, Uttar Pradesh.
13. Mohd. Husain Khan, Maharashtra.
14. Ms. Nafisa Hussain, New Delhi
15. Mohd. Salahuddin Siddiqui, Dist. Siwan (Bihar)
16. Azam Khan, Minister of Urban Development and Legislative Afairs, Uttar Pradesh.
17. Arif Baig, New Delhi
2005
1. Ghulam Nabi Azad, Minister of Parliamentary Affairs and Urban Development, Leader of the Delegation
2. Hameed Agha, Uttar Pradesh
3. Aziz Ahmed Khan, Uttar Pradesh
4. Mehboob khan Buggi, Uttar Pradesh
5. Mohd. Shabbir, Uttar Pradesh
6. Mohd. Irshad, Uttar Pradesh
7. Dr. Alia Zuberi, Uttar Pradesh
8. Mohd. Adib, Uttar Pradesh
9. Shafiqur Rahman Barq, MP(LS), Uttar Pradesh
10. Rasoolan, w/o- Late CQMH Abdul Hameed, PVC, Uttar Pradesh
11. Paltu Khan, Rajasthan
12. Nawab Khan, Rajasthan
13. M. Althaf Hussain Alias Tiruppur Althaf, Tamil Nadu
14. M. Basheer Ahamed, Municipal Chairman, Tamil Nadu
15. J. M. Aaron Rasheed, MP, Tamil Nadu
16. T. N. Sheikh, Tamil Nadu
17. Mohd. Abdul Salam, Manipur
18. Pirzada Siraj Madani Nizami, Delhi
19. Moulana Syed Athar Hussain Dehlavi, Delhi
20. Anees Durrani, Ex-Chairman, Delhi SHC, Delhi
21. Safdar Khan, Delhi
22. Dr. M. Wali, Sr. Physician, Dr. RML Hospital, Delhi
23. Md. Istiyaq, Delhi
24. Naved Hamid, Delhi
25. Zafar Jang, Andhra Pradesh
26. Hafiz Sabbir Ahmed, Andhra Pradesh
27. Sajjad Mirza, Journalist, Himayachal Pradesh
28. Abdul Rashid, Chairman. J&K Lrgislative Council J&K.
29. Syed Sadiq Ali Shihab Thangal, President Kerela Muslim Youth League, Kerala.
30. Varkala Kahar, MLA, Kerala
31. Badruddin Sheikh, Gujarat
32. John Momin, Gujarat
33. Anwar Hussain, MP (LS), Assam
34. Asghar Ali, Chairman, Kargil Hill Council, J&K.
2006 (I)
1. K. Rahman Khan, Deputy Chairman, Rajya Sabha, Leader of Delegation
2. Prof. Saifuddin Soz, MP, Rajya Sabha
3. Furqan Ansari, MP, Lok Sabha
4. Motiur Rahman, MP, Rajya Sabha
5. V. K. Ibrahim Kunju, Minister of Industries, Govt. of Kerala Seets
6. Justice K. A. Abdul Gafoor, Judge High Court of Kerala
7. Maulana Anzar Shah Masudi Kashmiri, Uttar Pradesh
8. Mufti Abdul Mannan Kallimi, Moradabad
9. Hisamul Islam Siddique, Editor, Jadeeb Markaz, Lucknow
10. Mohd. Azhar. s/o- Late Mohd. Akbar, Bareilly, UP
11. Janab Karam Elahi, Editor, Minhaj the way to Sufism, Noida, UP
12. Maulana Jabir Hussain, Vill. Kurkuri, Dist: Cachar, Assam
13. Syed Fida Ali, Photo Journalist, Delhi
14. Begum Qamar Jahan, President Al-Nisa Foundation, New Delhi
15. Imran Kidwai, 43, Mandakini Enclave, New Delhi
16. Hasan Ahmed, 187, Zakir Bagh, New Delhi
17. Choudhary Nizamuddin, 2042, Kalyanpura, Turkman Gate, Delhi
18. Qamar Ahmed, 2 Police Officers Flats, Mandir Marg, New Delhi
19. Zainul Basheer, Ex-Member of Parliament, New Delhi
20. Janab Abdul Majeed Abubakar Parekh, Byculla, Mumbai
21. Choudhary Khurshid Ahmed, Ex-Minister, Haryana, Faridabad
22. Nawab Mohammad Khadeeruddin Siddiqui, Hyderabad
23. K. Kasim. IPS (Rtd.). 1-B, New Natham Road, Madurai
24. K. Mohamed Ismail. 360 Nehru Street, Tamil Nadu
2006 (II)
1. E. Ahamed, Minister of State for External Affairs Leader of Delegation
2. Mohd. Ali Shabber, Minister for Information and Public Relations, Energy and Coal. Govt. ofAndhra Pradesh
3. Justice Nisar Ahmed Kakru, Judge od J&K High Court
4. Syed Hyderali Shihab Thangal, General Secretary, Jamia Nooria, Kerala.
5. Dr. Syed Manal Shah Alquadri, Sajjadanashin, Daira Sharief-e-Quadira, Daira Shariff, West Bengal
6. Syed Shamshul Hasan Arif, Exicutive Editor, Urdu Daily “The Daily Nadeem”. Bhopal
7. Dr. Shakeel-Uz-Zaman Ansari, Ex-Minister, Bihar
8. Prof. M. M. Ansari, Information Commissioner, Central Information Commission, New Delhi
9. Aimaduddin Ahmed Khan, MLA, Rajasthan
10. Zahid Raza Rizvi, Chairman, Uttaranchal Hajj Committee
11. Advocate Shakkeel Ahmed, Member, Central Waqf Board, New Delhi
12. Peer Khawaja Ahmed Nizami Syed Bukhari, Chief Head Prist. Dargah Hazrat, New Delhi
13. Mohammed Sohrab, S/o. Late E. R. Mohammed, West Bengal
14. Javed Ansari, Journalist, Uttar Pradesh
15. Jamaluddin Ahmed, Journalist, PTI, New Delhi
16. Gulam Rasool Khar, Ex-MP. J&K
17. Maulana Asghar Ali Salafi, Secretary General, Markazi Jamiat Ahle Hadees Hind, Delhi
18. Begum Andleeb Syed, Vice President, Al-Nisa, Foundation, Uttar Pradesh
19. Janab Sami Khateeb, President Anjuman-e-Islam, Mumbai
20. Gufram Zahidi, Ex-MP, Uttar Pradesh
21. Mudassir Hussain Zubair, J-III/64 1st floor, Sujan Singh Park, New Delhi
22. Salauddin Khan, Uttar Pradesh
23. Janab Mirza Mohd. Yasoob Abbas, Spokesperson, Shia Personal Law Board, Uttar Pradesh
24. Iqbal Ahmed Saradgi, MP- Lok Sabha, Karnataka
25. Anwara Taimur, MP, Rajya Sabha
26. Janab Gulam Mohammed Pesh-imam, Mumbai
27. Dr. Khawaja. M. Shahid, Joint Secretary, UPSC
2007
1. A R Antulay, Union Minister of Minority Affairs, Leader of Delegation
2. Justice Allah-e-Rahim, Judge, Lucknow Bench of Allahabad High Court
3. Haroon Yusuf, Minister of Transport, Govt. of Delhi
4. Dr Ayoub Ali Khan, MBBS
5. Dr Akhtar Hussain Qasmi, Ex MLA, UP
6. Mehbooba Mufti, MP, Lok Sabha
7. Prof K M Kader Mohideen, MP, Lok Sabha
8. Akhtarul Wasey, Professor, Jamia Millia Islamia
9. Arshad Madani, President, Jamiat Ulama-I-Hind
10. Syed Tariq Bukhari, Gen. Sec. Jama Masjid Delhi Mushawarat Council
11. Maulana Mohd Usman Owaisi, Nazim, Jamia Darul Uloom, Ajmer
12. Hafiz Abdullah Qureshi, Imam, Makkah Masjid, Hyderabad
13. Maulana Mufti Ashraf Ali, Principal, Darul Uloom Sabilur Rishad, Bangalore
14. ET Mohammed Basheer, Ex Minister, Kerala
15. TH Mustafa, Ex Minister, Kerala
16. Dr Aliya Zuberi, Member, AICC, UP
17. Khursheed Saiyed, Gen. Sec. Gujarat Pradesh Congress Committee
18. Suheb Parwez, Publisher, Hindustan Express, Urdu daily, Delhi
19. Ahmed Saeed Malihabadi, Editor, Azad Hind & Ujala Weekly, Kolkata
20. Waseem Ahmed, Ex MP
21. Kaleemul Hafiz, NGO, Aman, J&K
22. Abdul Vadood, Social Worker, Rae Bareli
23. Ahmed Hassan, Editor, Qalam Weekly, Kolkata
24. Mohd Ahmed Khan, Bureau Chief, Munsif Daily, Hyderabad
25. Jannath Hussain, Principal Secretary, Govt of Andhra Pradesh
26. Captain Abbas Ali, Veteran Freedom Fighter
27. Shafiqur Rahman Barq, MP, Lok Sabha
28. Sahibzada Syed Nazim Ali Nizami
29. Lutfur Rahman Laskar, IAS, Retd.
2008
1. Syed Sibtey Razi, Governor, Jharkhand, Leader of Delegation
2. Dr Nazrul Islam, Minister of Civil Supplies, Govt of Assam
3. Justice Aftab Hussain Saikia, Guwahati High Court
4. Pee Vee Abdul Wahab, MP, Rajya Sabha
5. Amir Alam Khan, MP, Rajya Sabha
6. Iqbalbhai Patel, MLA, Gujarat
7. Maulana Muhibullha Nadvi, Imam Jama Masjid, Parliament Street
8. Dr M Sharfuddin Sahil, president, Jamiat Ulema Nagpur
9. Syed Azhar Hussain, Sec. Anjuman Minhaje Rasool, Delhi
10. CM Ibrahim, Ex Union Minister
11. Saiduzzaman, Ex MP, UP
12. Sarfaraz Ahmed, Ex MP, Bihar
13. M M Hasan, Ex Minister, Kerala
14. Humayun Reza, EX MLA
15. Umar Ali Khan, Gen. Sec. Muslim Youth Conference
16. Mukhtarul Haque, UP
17. S J Abbas Safvi, New Delhi
18. Nasreen Hamid, Delhi
19. Nafeesa Ali Sodhi, New Delhi
20. Bani Israil Sheikh, Social Worker, West Bengal
21. Zuber Ahmed, Maulana Azad Education Foundation
22. TPM Ibrahim Khan, Ex Member, Maulana Azad Education Foundation
23. Seema Kidwai, Social Worker, New Delhi
24. O Abdulla, Kerala
25. Md Waseemul Haque, Editor, Akhbar-e-Mashriq
26. Mohd Shafi Pandit, Chairman, J&K Public Service Commission
27. Ahmed Saeed Khan, DGP, Puducherry
28. Ghulam Rasool Sufi, Commissioner of Income Tax, Amritsar
29. Mohd Khalil Ansari, Ex MLA, Bihar
30. Haji Mohd Naqi Malhotra, president, Shahi Idgah Managing Committee, Delhi
31. Peerzada Ayazuddin Chishty, Sajjada Nasheen of Dargah Hazrat Saleem Chishti, Fatehpur Sikri,Agra
32. Mohd Haroon Raseed
33. Mohd Nayeed
34. Abdul Hannan