शनिवार, 12 जून 2010

गुजरात की विकास कथा का सच्चाईनामा

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एक विचारधारा विशेष के लोग जिस ज़िले की पहचान कभी आतंक की राजधानी के नाम से करते नज़र आते हैं, उन्हीं का राजनीतिक चेहरा अगर उसी ज़िले की तस्वीरों के आधार पर अपने विकास की कथा कहे तो इसे क्या कहा जाएगा।

'सहारा समय ' एक्सक्लूसिव

पाणिनि आनंद
विशेष संवाददाता

ऐसा ताज़ा मामला सामने आया है बिहार में जहाँ भाजपा कार्यकारिणी से ठीक पहले छपे गुजरात सरकार के विज्ञापनों में अल्पसंख्यकों के हित की जो कहानी कही गई है, उसमें दरअसल आज़मगढ़ की मुस्लिम लड़कियों की तस्वीरें हैं।

यानी गुजरात सरकार मुसलमानों को फायदे पहुंचाने की जो बात अपने विज्ञापनों में कह रही है वो वहाँ की ज़मीनी सच्चाई के आधार पर नहीं, बल्कि जुगाड़ के ज़रिए प्रचार की कोशिश नज़र आती है।

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक शनिवार को पटना में शुरू हो रही है और इससे ठीक पहले विज्ञापनों के ज़रिए न केवल भाजपा समर्थकों, बल्कि अल्पसंख्यकों को भी यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि भाजपा उनकी हितैषी है।

इस काम के लिए पार्टी ने अपनी ऐसी राज्य सरकार को चुना है जिसके माथे पर वर्ष 2002 के सांप्रदायिक दंगों का दाग है. हिंदु हृदय सम्राट जैसे विशेषणों से नवाजे गए नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ने राज्य के कई प्रमुख अखबारों में अपने विज्ञापन छपवाए हैं।

इस विज्ञापनों में मोदी जी की तस्वीर के साथ यह बखान किया गया है कि कैसे सच्चर कमेटी की सिफारिशों से लेकर बाकी कई मोर्चों पर गुजरात की सरकार ने मुसलमानों की मदद की है और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया है।

पर विज्ञापन बनाते समय राज्य सरकार के प्रतिनिधि अपने राज्य की सीमाओं में रह रहे अल्पसंख्यकों की तस्वीरें तक न जुटा सके. जिन लड़कियों को इन विज्ञापनों में हिजाब पहनकर कंप्यूटर की क्लास में बैठे हुए दिखाया गया है, वे दरअसल शिबली कॉलेज, आज़मगढ़ की लड़कियां हैं।

एक वेबसाइट, टूसर्किल्स डॉट नेट में 24 नवंबर, 2008 को दोपहर 11.24 बजे एक कहानी प्रकाशित की गई थी जो शिबली नेशनल स्नात्कोत्तर कॉलेज, आज़मगढ़ पर आधारित थी।

वेबसाइट पर यह कहानी लिखने वाले और इन तस्वीरों को प्रकाशित करनेवाले रिपोर्टर मुमताज़ आलम फलाही ने बताया कि उन्होंने खुद यह तस्वीर ली थी और आज भी उनके पास इस तस्वीर की मूल प्रति मौजूद है। यह कहानी तस्वीरों के साथ आज भी वेबसाइट पर है और इसे देखा-पढ़ा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मुझे यह देखकर अफसोस हुआ कि गुजरात सरकार के पास अपनी उपलब्धियों को दिखाने के लिए एक तस्वीर तक नहीं है। उन्होंने तस्वीर चुराई और विज्ञापन में इस्तेमाल की जो कि नैतिक रूप से तो ग़लत है ही, लोगों के साथ एक धोखा भी है।

रिपोर्टर मुमताज़ आलम फलाही ने कहा है कि इस तस्वीर चोरी के मामले में टूसर्किल्स डॉट नेट बेबसाइट के मालिक गुजरात सरकार पर कॉपीराइट का दावा करने के बारे में विधि विशेषज्ञों से राय मशविरा ले रहे हैं, और इस मामले में कार्रवाई करेंगे।

दिलचस्प बात यह है कि आज़मगढ़ पिछले कुछ वर्षों में जब-जब खबरों में आया है, भाजपा के कुछ बड़े नेता और हिंदुत्ववादी संगठन उत्तर प्रदेश के इस ज़िले को कभी आतंक की राजधानी कहते रहे हैं तो कभी आतंकवादियों का गढ़ पर उसी आज़मगढ़ में इल्म हासिल कर रही मुस्लिम लड़कियां अब गुजरात के अल्पसंख्यकों के विकास का चेहरा बन गई हैं।

भारतीय जनता पार्टी की ओर से अभी इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है और न ही गुजरात सरकार ने इसे लेकर कोई स्पष्टीकरण छापा है. वैसे दिलचस्प है कि कार्यकारिणी की बैठक से ठीक पहले गुजरात के विज्ञापन बिहार में छपवाकर भाजपा या नरेंद्र मोदी क्या संदेश देना चाहते हैं।

जानकार मानते हैं कि इस कोशिश से नरेंद्र मोदी ने कई शिकार करने की कोशिश की है। एक तो यह कि इस विज्ञापन के ज़रिए उन लोगों को जवाब देने की कोशिश की गई है जो नीतीश के राज्य में मोदी के आतिथ्य पर टिप्पणियां करेंगे।

दूसरा नरेंद्र मोदी की मुस्लिम विरोधी छवि को कमज़ोर करना है और तीसरा उस गठबंधन धर्म को निभाना है जिसके आधार पर नीतीश-भाजपा की गठबंधन सरकार राज्य में सत्तासीन है।

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